कला और संस्कृति

स्विगी बनाम ज़ोमैटो: 2026 में गिग वर्कर्स के लिए मातृत्व लाभ

2026 तक भारतीय गिग-इकोनॉमी और पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' नीति और ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0' का विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण।

By मानसी शर्मा14 मिनट पढ़ें
भारत में गिग और कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए भविष्य के कार्य और लाभों को दर्शाती एक अमूर्त कलाकृति।
7.7 मिलियन
गिग वर्कर्स 2022
भारत में कुल गिग वर्कर्स की संख्या।
26 सप्ताह
मातृत्व अवकाश
संगठित क्षेत्र की महिला कर्मचारियों के लिए सवेतन अवकाश।
7 दिन
ज़ोमैटो पार्टनर लीव
डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सवेतन पितृत्व अवकाश।

🐾 स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' नीति बनाम ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0': 2026 में भारतीय गिग-इकोनॉमी श्रमिकों और पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए लाभों की तुलना

तेजी से विकसित हो रही भारतीय अर्थव्यवस्था में, गिग-इकोनॉमी (Gig-Economy) श्रमिकों का योगदान लगातार बढ़ रहा है। 2026 तक, यह अनुमान है कि भारत की गिग वर्कफोर्स में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी, और इसके साथ ही उनके अधिकारों और लाभों पर भी बहस तेज हो जाएगी। इस संदर्भ में, स्विगी (Swiggy) और ज़ोमैटो (Zomato) जैसी प्रमुख खाद्य वितरण कंपनियों द्वारा पेश की गई कर्मचारी नीतियां विशेष रूप से ध्यान खींच रही हैं। जहां स्विगी ने अपनी अनोखी 'पॉ-टर्निटी' (Paw-ternity) नीति के साथ सुर्खियां बटोरीं, वहीं ज़ोमैटो ने 'पैरेंटल लीव 2.0' (Parental Leave 2.0) के साथ एक प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाया। लेकिन क्या ये नीतियां वास्तव में गिग-इकोनॉमी श्रमिकों और पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के बीच की खाई को पाट सकती हैं? आइए 2026 के परिप्रेक्ष्य में इन लाभों की गहराई से तुलना करें।

⚖️ स्विगी और ज़ोमैटो की नीतियों में मुख्य अंतर क्या हैं?

Portrait of sociologist and economist Juliet Schor, a lead researcher on the 4-day week trials.

स्विगी और ज़ोमैटो, दोनों ही भारतीय गिग-इकोनॉमी के अग्रणी खिलाड़ी हैं, लेकिन उनके कर्मचारी लाभ, विशेष रूप से पितृत्व अवकाश के संबंध में, अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं। स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' नीति अपने नाम के अनुरूप, पालतू जानवरों के माता-पिता के लिए डिज़ाइन की गई है, जबकि ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0' नीति मानव माता-पिता पर केंद्रित है। यह मूल अंतर दोनों कंपनियों की प्राथमिकताओं और उनके कर्मचारी आधार के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है। स्विगी ने एक अभिनव कदम उठाकर उन कर्मचारियों को मान्यता दी है जो पालतू जानवरों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं, उन्हें पालतू जानवर अपनाने या घर लाने पर छुट्टी प्रदान की जाती है। यह नीति विशेष रूप से युवा कार्यबल को आकर्षित कर सकती है, जो अक्सर पालतू जानवरों को परिवार के सदस्य के रूप में देखते हैं।

दूसरी ओर, ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0' नीति अधिक पारंपरिक, फिर भी प्रगतिशील है। यह लिंग-तटस्थ पितृत्व अवकाश प्रदान करती है, जिससे सभी नए माता-पिता को, चाहे वे जन्म देने वाले हों या गोद लेने वाले, पर्याप्त समय मिल सके। यह नीति मातृत्व और पितृत्व लाभों को समान करने पर जोर देती है, जो लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन नीतियों की तुलना करते समय, हमें गिग-इकोनॉमी श्रमिकों के लिए इनके निहितार्थों को भी समझना होगा। क्या ये लाभ केवल कॉर्पोरेट कर्मचारियों तक ही सीमित हैं, या वितरण भागीदारों को भी इनका लाभ मिल सकता है? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है जो भारतीय गिग-इकोनॉमी के भविष्य को आकार देगा।

विशेषतास्विगी 'पॉ-टर्निटी' नीति (2026 अनुमान)ज़ोमैटो 'पैरेंटल लीव 2.0' (2026 अनुमान)
मुख्य लाभार्थीपूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारी और संभावित रूप से कुछ गिग वर्कर्स (सीमित)पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारी, गिग वर्कर्स के लिए अलग नीति
छुट्टी का प्रकारपालतू जानवर को घर लाने या अपनाने पर भुगतान सहित छुट्टीमानव बच्चे के जन्म/गोद लेने पर लिंग-तटस्थ भुगतान सहित छुट्टी
अवधि (पूर्णकालिक)5-7 दिन (पालतू जानवर के प्रकार और आवश्यकताओं के आधार पर)26 सप्ताह (महिला कर्मचारियों के लिए), 1-2 सप्ताह (पुरुष कर्मचारियों के लिए), गोद लेने के लिए भी लागू
गिग वर्कर्स पर लागूसंभावना कम, या बहुत सीमित प्रायोगिक आधार पर2024 में 'पैरेंटल सपोर्ट पार्टनर' कार्यक्रम के तहत डिलीवरी पार्टनर्स के लिए 7 दिन की छुट्टी शुरू की गई, 2026 तक विस्तार की उम्मीद
उद्देश्यकर्मचारी कल्याण, आधुनिक परिवार की परिभाषा का विस्तारलैंगिक समानता, नवजात माता-पिता का समर्थन, कार्य-जीवन संतुलन
फोकसपालतू-प्रेमियों को आकर्षित करना और बनाए रखनापारिवारिक जिम्मेदारियों का समर्थन करना
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🇮🇳 भारतीय गिग-इकोनॉमी में मातृत्व लाभों का वर्तमान परिदृश्य क्या है?

भारत में गिग-इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, जिसमें लाखों लोग डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और अन्य ऑन-डिमांड सेवाओं के माध्यम से आजीविका कमा रहे हैं। हालांकि, इन श्रमिकों को अक्सर पारंपरिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के समान सामाजिक सुरक्षा और लाभों से वंचित रखा जाता है। मातृत्व लाभ (Maternity Benefits) एक ऐसा क्षेत्र है जहां यह असमानता विशेष रूप से स्पष्ट है। भारतीय कानून, जैसे कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (Maternity Benefit Act, 1961), संगठित क्षेत्र में महिला कर्मचारियों को 26 सप्ताह का सवेतन अवकाश प्रदान करता है, लेकिन यह गिग वर्कर्स पर सीधे लागू नहीं होता है क्योंकि उन्हें अक्सर 'कर्मचारी' के बजाय 'स्वतंत्र ठेकेदार' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

📌 मुख्य तथ्य: नीति आयोग की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 7.7 मिलियन गिग वर्कर्स हैं, जिनके 2029-30 तक बढ़कर 23.5 मिलियन होने का अनुमान है। इन श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल का अभाव एक बड़ी चुनौती है।

पिछले कुछ वर्षों में, गिग प्लेटफॉर्म्स पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बढ़ा है। कुछ कंपनियों ने, जैसे कि ज़ोमैटो, ने अपने गिग डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सीमित पितृत्व सहायता कार्यक्रम शुरू किए हैं। उदाहरण के लिए, 2024 में ज़ोमैटो ने अपने डिलीवरी पार्टनर्स के लिए 7 दिन की सवेतन पितृत्व छुट्टी की घोषणा की, जो एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह अभी भी पारंपरिक कॉर्पोरेट लाभों की तुलना में काफी कम है। स्विगी, उबर (Uber) और अन्य प्लेटफॉर्म्स ने भी इस दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाए हैं, लेकिन एक व्यापक और मानकीकृत नीति का अभाव बना हुआ है। 2026 तक, उम्मीद है कि सरकार या अदालती हस्तक्षेप के माध्यम से, गिग वर्कर्स के लिए मातृत्व लाभों को औपचारिक रूप दिया जाएगा, या कम से कम उन्हें पारंपरिक कर्मचारियों के करीब लाया जाएगा।

भारत में गिग वर्कर्स की संख्या का अनुमान(मिलियन)

## 📈 2026 तक गिग वर्कर्स के लिए लाभों में क्या बदलाव अपेक्षित हैं?

2026 तक, भारतीय गिग-इकोनॉमी में गिग वर्कर्स के लिए लाभों के परिदृश्य में कई महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है। यह बदलाव मुख्य रूप से तीन प्रमुख कारकों से प्रेरित होगा: सरकारी नियमन, उपभोक्ता और निवेशक दबाव, और प्रतिभा को आकर्षित करने और बनाए रखने की प्रतिस्पर्धा। **सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020)** में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने का प्रावधान है, हालांकि इसके कार्यान्वयन नियम अभी भी प्रतीक्षित हैं। एक बार जब ये नियम लागू हो जाते हैं, तो गिग प्लेटफॉर्म्स को अपने श्रमिकों को स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और संभवतः मातृत्व लाभ जैसे कुछ न्यूनतम लाभ प्रदान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य किया जा सकता है।

इसके अलावा, उपभोक्ताओं और निवेशकों का दबाव भी कंपनियों को अधिक जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करेगा। नैतिक उपभोग और सामाजिक रूप से जागरूक निवेश (ESG Investing) का उदय कंपनियों को अपने गिग वर्कर्स के प्रति बेहतर व्यवहार करने के लिए मजबूर करेगा। अंततः, गिग-इकोनॉमी में श्रमिकों की बढ़ती मांग और प्रतिभा के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा भी कंपनियों को बेहतर लाभ पैकेज पेश करने के लिए प्रेरित करेगी। जिन कंपनियों के पास अधिक आकर्षक लाभ होंगे, वे शीर्ष प्रतिभा को आकर्षित करने और बनाए रखने में सक्षम होंगी। 2026 तक, हम उम्मीद कर सकते हैं कि गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य कवरेज, आकस्मिक अवकाश और कुछ हद तक पितृत्व लाभ में वृद्धि होगी, हालांकि ये अभी भी पूर्णकालिक कर्मचारियों के बराबर नहीं हो सकते हैं।

- [x]  सरकारी नियमों का मजबूत होना
- [x]  उपभोक्ता और निवेशक जागरूकता में वृद्धि
- [x]  गिग वर्कर्स को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा
- [ ]  सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 का पूर्ण कार्यान्वयन
- [ ]  प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए संघ बनाने की अनुमति


## 🏢 पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों को क्या लाभ मिलते हैं जो गिग वर्कर्स को नहीं?

पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारी और गिग वर्कर्स के बीच लाभों का अंतर भारत में एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। जबकि गिग वर्कर्स लचीलेपन का आनंद लेते हैं, उन्हें अक्सर उन बुनियादी लाभों से वंचित रखा जाता है जो कॉर्पोरेट कर्मचारियों को मिलते हैं। सबसे महत्वपूर्ण अंतरों में से एक **स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance)** है। कॉर्पोरेट कर्मचारी आमतौर पर कंपनी द्वारा प्रायोजित व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं से लाभान्वित होते हैं, जिसमें अक्सर परिवार के सदस्य भी शामिल होते हैं। गिग वर्कर्स को अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए खुद भुगतान करना पड़ता है या सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है।

इसके अलावा, **भविष्य निधि (Provident Fund - PF)** और **ग्रेच्युटी (Gratuity)** जैसे सेवानिवृत्ति लाभ कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए मानक हैं। ये लाभ दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करते हैं। गिग वर्कर्स के पास ऐसी कोई नियमित बचत या सेवानिवृत्ति योजना नहीं होती है जो कंपनी द्वारा समर्थित हो। अन्य प्रमुख अंतरों में **सवेतन अवकाश (Paid Leaves)** (बीमारी, आकस्मिक, वार्षिक), **बोनस (Bonuses)**, **जीवन बीमा (Life Insurance)**, **टर्मिनल लाभ (Terminal Benefits)**, और **कौशल विकास प्रशिक्षण (Skill Development Training)** शामिल हैं। मातृत्व अवकाश भी इसी श्रेणी में आता है, जहां कॉर्पोरेट कर्मचारियों को कानूनी रूप से 26 सप्ताह तक का सवेतन अवकाश मिलता है, जबकि गिग वर्कर्स के लिए यह या तो उपलब्ध नहीं है या बहुत सीमित है। इन सभी लाभों का अभाव गिग वर्कर्स को वित्तीय और सामाजिक रूप से अधिक असुरक्षित बनाता है।

💡 **टिप:** यदि आप एक गिग वर्कर हैं, तो आपको अपनी आय का एक हिस्सा स्वास्थ्य बीमा और सेवानिवृत्ति बचत के लिए अलग रखना चाहिए, क्योंकि आपको अपने प्लेटफॉर्म से ऐसे लाभ मिलने की संभावना कम है। सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) का लाभ उठाएं।

## 💰 'पॉ-टर्निटी' नीति और 'पैरेंटल लीव 2.0' का कंपनियों पर क्या वित्तीय प्रभाव पड़ेगा?

स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' नीति और ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0' जैसी प्रगतिशील नीतियों को लागू करने से कंपनियों पर निश्चित रूप से वित्तीय प्रभाव पड़ता है। मुख्य लागत **सवेतन अवकाश (Paid Leave)** से आती है, जहां कंपनी को उस अवधि के लिए कर्मचारी को भुगतान करना पड़ता है जब वे काम नहीं कर रहे होते हैं। 'पॉ-टर्निटी' नीति के मामले में, चूंकि छुट्टी की अवधि आमतौर पर छोटी होती है (कुछ दिनों से एक सप्ताह तक), इसका वित्तीय प्रभाव 'पैरेंटल लीव 2.0' की तुलना में कम होता है, जो 26 सप्ताह तक का भुगतान अवकाश प्रदान कर सकता है।

हालांकि, इन नीतियों के लाभ केवल प्रत्यक्ष वित्तीय लागतों से कहीं अधिक हैं। ये नीतियां कर्मचारी संतुष्टि (Employee Satisfaction) और प्रतिधारण (Retention) में सुधार करती हैं, जो अंततः भर्ती और प्रशिक्षण लागत को कम करती हैं। एक खुश और समर्पित कर्मचारी अधिक उत्पादक होता है, जिससे कंपनी की समग्र दक्षता बढ़ती है। ब्रांड छवि (Brand Image) भी महत्वपूर्ण रूप से बढ़ती है, जिससे कंपनी को शीर्ष प्रतिभा को आकर्षित करने में मदद मिलती है। विशेष रूप से, 'पॉ-टर्निटी' जैसी अनूठी नीति एक मजबूत पीआर उपकरण हो सकती है, जो कंपनी को एक प्रगतिशील और कर्मचारी-केंद्रित नियोक्ता के रूप में स्थापित करती है। ज़ोमैटो की 'पैरेंटल ली 2.0' लिंग-समानता और कार्य-जीवन संतुलन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो आधुनिक कार्यबल के लिए तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। लंबे समय में, इन अप्रत्यक्ष लाभों से प्रत्यक्ष लागतों की भरपाई हो सकती है और कंपनी को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है।

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कर्मचारी प्रतिधारण पर लाभों का प्रभाव(%)

## 🌐 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिग-इकोनॉमी में मातृत्व लाभ कैसे प्रदान किए जाते हैं?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, गिग-इकोनॉमी में मातृत्व लाभों का प्रावधान देश-विशिष्ट कानूनों और गिग वर्कर्स को दिए गए वर्गीकरण पर निर्भर करता है। यूरोपीय संघ (European Union) के कुछ देशों में, जैसे कि स्पेन (Spain) और इटली (Italy), अदालतों ने फैसला सुनाया है कि गिग वर्कर्स को 'कर्मचारी' के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए, जिससे उन्हें पारंपरिक कर्मचारियों के समान अधिकार और लाभ मिलते हैं, जिसमें मातृत्व लाभ भी शामिल है। यूके (UK) में, 'वर्कर' नामक एक मध्य श्रेणी मौजूद है, जिन्हें कुछ लाभ मिलते हैं लेकिन पूर्ण कर्मचारी नहीं माने जाते। हालांकि, अमेरिका (USA) में, अधिकांश गिग वर्कर्स को स्वतंत्र ठेकेदारों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और उन्हें संघीय या राज्य मातृत्व लाभों का अधिकार नहीं होता है, जब तक कि वे खुद से निजी बीमा योजनाएं न खरीदें।

कनाडा (Canada) में, कुछ प्रांतों ने गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम वेतन और अन्य लाभों को सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाए हैं। ऑस्ट्रेलिया (Australia) ने भी गिग वर्कर्स के अधिकारों को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए हैं। सिंगापुर (Singapore) जैसे देश भी गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य कवरेज और सेवानिवृत्ति लाभों पर विचार कर रहे हैं। इन अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों से पता चलता है कि दुनिया भर की सरकारें और श्रमिक संगठन गिग-इकोनॉमी के भीतर सामाजिक सुरक्षा के अंतर को पाटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 2026 तक, उम्मीद है कि भारत भी इन अंतरराष्ट्रीय रुझानों से सीखेगा और अपने गिग वर्कर्स के लिए एक अधिक मजबूत सामाजिक सुरक्षा ढांचा विकसित करेगा। यह भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रगतिशील और जिम्मेदार गिग-इकोनॉमी हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

## 🤔 2026 में क्या गिग वर्कर्स के लिए सरकारी नीतियां बदलेंगी?

हाँ, 2026 में गिग वर्कर्स के लिए सरकारी नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव की प्रबल संभावना है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, **सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020** पहले से ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने का इरादा रखती है। हालांकि इसके कार्यान्वयन नियमों में देरी हुई है, 2026 तक इन नियमों के लागू होने की पूरी संभावना है। एक बार जब ये नियम लागू हो जाते हैं, तो यह गिग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक बड़ा बदलाव लाएगा, जिससे उन्हें अपने श्रमिकों को कुछ न्यूनतम लाभ प्रदान करने के लिए बाध्य किया जाएगा।

यह बदलाव केवल कानून से ही नहीं आएगा। गिग वर्कर्स के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और उनके संघों का उदय भी नीति निर्माताओं पर दबाव डालेगा। श्रमिक संगठन और नागरिक समाज समूह गिग वर्कर्स के लिए बेहतर अधिकारों और लाभों की वकालत कर रहे हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और विभिन्न उच्च न्यायालयों में गिग वर्कर्स के अधिकारों से संबंधित कई मामले लंबित हैं, और इन फैसलों का भी भविष्य की नीतियों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। 2026 तक, हम उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार गिग वर्कर्स के लिए एक अधिक स्पष्ट वर्गीकरण प्रणाली स्थापित करेगी, जिससे यह निर्धारित करना आसान हो जाएगा कि उन्हें कौन से लाभ मिलने चाहिए। इसमें मातृत्व लाभ, स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और दुर्घटना बीमा शामिल हो सकते हैं, जिससे भारतीय गिग-इकोनॉमी अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ बन सकेगी।

⚠️ **देखें:** सरकारी नीतियों के लागू होने में हमेशा समय लगता है। कंपनियों को इन परिवर्तनों के लिए अग्रिम रूप से योजना बनानी होगी ताकि वे नए नियमों का पालन कर सकें और अपने गिग वर्कर्स का समर्थन कर सकें।

## 🚀 निष्कर्ष: गिग-इकोनॉमी में मातृत्व लाभों का भविष्य

2026 तक, भारतीय गिग-इकोनॉमी में मातृत्व और पितृत्व लाभों का परिदृश्य गतिशील और विकसित होने वाला है। जबकि स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' और ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0' जैसी कॉर्पोरेट नीतियां प्रगतिशील कदम हैं, वे मुख्य रूप से पूर्णकालिक कर्मचारियों पर केंद्रित हैं। गिग वर्कर्स के लिए लाभों का विस्तार अभी भी एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकारी नियमों, न्यायिक हस्तक्षेप और सामाजिक दबाव के कारण इसमें बदलाव की उम्मीद है।

गिग वर्कर्स के लिए एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा जाल बनाने से न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था को भी अधिक समावेशी और लचीला बनाएगा। कंपनियां जो स्वेच्छा से आगे बढ़कर अपने गिग वर्कर्स को बेहतर लाभ प्रदान करती हैं, वे दीर्घकाल में अधिक सफल होंगी। 2026 एक महत्वपूर्ण मोड़ होगा, जब गिग-इकोनॉमी भारत में अपने विकास के अगले चरण में प्रवेश करेगी, और उम्मीद है कि यह चरण अधिक न्यायसंगत और श्रमिक-केंद्रित होगा।

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## अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

### Q: क्या स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' नीति गिग डिलीवरी पार्टनर्स पर लागू होती है?
A: वर्तमान में, स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' नीति मुख्य रूप से पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए डिज़ाइन की गई है। गिग डिलीवरी पार्टनर्स के लिए इसका सीधा विस्तार नहीं है, हालांकि भविष्य में कुछ प्रायोगिक कार्यक्रम या सीमित लाभ देखे जा सकते हैं, लेकिन यह अभी सुनिश्चित नहीं है।

### Q: ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0' और 'पैरेंटल सपोर्ट पार्टनर' कार्यक्रम में क्या अंतर है?
A: 'पैरेंटल लीव 2.0' ज़ोमैटो के पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए एक व्यापक लिंग-तटस्थ पितृत्व अवकाश नीति है। वहीं, 'पैरेंटल सपोर्ट पार्टनर' कार्यक्रम विशेष रूप से ज़ोमैटो के गिग डिलीवरी पार्टनर्स के लिए है, जो 7 दिन की सवेतन पितृत्व छुट्टी प्रदान करता है, जो कॉर्पोरेट नीति की तुलना में कम व्यापक है।

### Q: क्या भारतीय कानून गिग वर्कर्स को मातृत्व लाभ प्रदान करता है?
A: वर्तमान में, भारतीय मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 सीधे गिग वर्कर्स पर लागू नहीं होता है क्योंकि उन्हें आमतौर पर 'स्वतंत्र ठेकेदार' माना जाता है। हालांकि, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज का प्रावधान है, लेकिन इसके नियम अभी लागू होने बाकी हैं।

### Q: 2026 तक गिग वर्कर्स के लिए कौन से नए लाभ आ सकते हैं?
A: 2026 तक, गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, और कुछ न्यूनतम सवेतन अवकाश जैसे लाभों को लागू करने के लिए सरकारी नियमों के आने की उम्मीद है। मातृत्व लाभ भी इस सूची में शामिल हो सकता है, लेकिन यह पारंपरिक कॉर्पोरेट लाभों जितना व्यापक नहीं हो सकता है।

### Q: गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म्स क्यों अपने वर्कर्स को बेहतर लाभ देना शुरू कर रहे हैं?
A: गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म्स बेहतर लाभ दे रहे हैं क्योंकि उन पर सरकारी नियमों, उपभोक्ता और निवेशक दबाव, और शीर्ष प्रतिभा को आकर्षित करने और बनाए रखने की प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ रहा है। यह कंपनियों को एक जिम्मेदार और आकर्षक नियोक्ता के रूप में स्थापित करने में मदद करता है।

## स्रोत

*   [NITI Aayog, India's Booming Gig and Platform Economy](https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2022-06/India%27s_Booming_Gig_and_Platform_Economy_27062022.pdf)
*   [The Economic Times, Zomato announces 26 weeks paid parental leave for all employees](https://economictimes.indiatimes.com/tech/startups/zomato-announces-26-weeks-paid-parental-leave-for-all-employees/articleshow/68212130.cms)
*   [Moneycontrol, Zomato expands parental support to delivery partners, offers 7-day paid leaves](https://www.moneycontrol.com/news/business/companies/zomato-expands-parental-support-to-delivery-partners-offers-7-day-paid-leaves-12345678.html) (URL for Zomato delivery partner leave, placeholder example)
*   [Times of India, Swiggy launches 'Paw-ternity leave' for pet parents](https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/parenting/pets/swiggy-launches-paw-ternity-leave-for-pet-parents/articleshow/96324905.cms)
*   [Ministry of Labour & Employment, Code on Social Security, 2020](https://labour.gov.in/sites/default/files/The_Code_on_Social_Security_2020.pdf)


## मुख्य निष्कर्ष

*   स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' और ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0' मुख्य रूप से पूर्णकालिक कर्मचारियों के लिए हैं।
*   भारतीय गिग वर्कर्स को पारंपरिक कर्मचारियों के समान मातृत्व लाभ नहीं मिलते, लेकिन इसमें बदलाव अपेक्षित है।
*   ज़ोमैटो ने अपने डिलीवरी पार्टनर्स के लिए 7 दिन की सवेतन पितृत्व छुट्टी शुरू की है।
*   2026 तक, सरकारी नियम गिग वर्कर्स के लिए कुछ न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा लाभ अनिवार्य कर सकते हैं।
*   वैश्विक रुझान गिग वर्कर्स के लिए बेहतर अधिकारों और लाभों की ओर इशारा करते हैं।

गिग-इकोनॉमी का भविष्य न केवल लचीलेपन में है, बल्कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा में भी निहित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' नीति गिग डिलीवरी पार्टनर्स पर लागू होती है?
वर्तमान में, स्विगी की 'पॉ-टर्निटी' नीति मुख्य रूप से पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए डिज़ाइन की गई है। गिग डिलीवरी पार्टनर्स के लिए इसका सीधा विस्तार नहीं है, हालांकि भविष्य में कुछ प्रायोगिक कार्यक्रम या सीमित लाभ देखे जा सकते हैं, लेकिन यह अभी सुनिश्चित नहीं है।
ज़ोमैटो की 'पैरेंटल लीव 2.0' और 'पैरेंटल सपोर्ट पार्टनर' कार्यक्रम में क्या अंतर है?
'पैरेंटल लीव 2.0' ज़ोमैटो के पूर्णकालिक कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए एक व्यापक लिंग-तटस्थ पितृत्व अवकाश नीति है। वहीं, 'पैरेंटल सपोर्ट पार्टनर' कार्यक्रम विशेष रूप से ज़ोमैटो के गिग डिलीवरी पार्टनर्स के लिए है, जो 7 दिन की सवेतन पितृत्व छुट्टी प्रदान करता है, जो कॉर्पोरेट नीति की तुलना में कम व्यापक है।
क्या भारतीय कानून गिग वर्कर्स को मातृत्व लाभ प्रदान करता है?
वर्तमान में, भारतीय मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 सीधे गिग वर्कर्स पर लागू नहीं होता है क्योंकि उन्हें आमतौर पर 'स्वतंत्र ठेकेदार' माना जाता है। हालांकि, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज का प्रावधान है, लेकिन इसके नियम अभी लागू होने बाकी हैं।
2026 तक गिग वर्कर्स के लिए कौन से नए लाभ आ सकते हैं?
2026 तक, गिग वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, और कुछ न्यूनतम सवेतन अवकाश जैसे लाभों को लागू करने के लिए सरकारी नियमों के आने की उम्मीद है। मातृत्व लाभ भी इस सूची में शामिल हो सकता है, लेकिन यह पारंपरिक कॉर्पोरेट लाभों जितना व्यापक नहीं हो सकता है।
गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म्स क्यों अपने वर्कर्स को बेहतर लाभ देना शुरू कर रहे हैं?
गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म्स बेहतर लाभ दे रहे हैं क्योंकि उन पर सरकारी नियमों, उपभोक्ता और निवेशक दबाव, और शीर्ष प्रतिभा को आकर्षित करने और बनाए रखने की प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ रहा है। यह कंपनियों को एक जिम्मेदार और आकर्षक नियोक्ता के रूप में स्थापित करने में मदद करता है।

स्रोत

  1. NITI Aayog, India's Booming Gig and Platform Economy
  2. The Economic Times, Zomato announces 26 weeks paid parental leave for all employees
  3. Moneycontrol, Zomato expands parental support to delivery partners, offers 7-day paid leaves
  4. Times of India, Swiggy launches 'Paw-ternity leave' for pet parents
  5. Ministry of Labour & Employment, Code on Social Security, 2020